“भीड़ में सावधान रहिए, अकेले में आत्ममंथन करें”
आजकल की दुनिया में हम अक्सर समाज की भाग-दौड़ और भीड़-भाड़ का हिस्सा होते हैं। कहीं न कहीं, हमें यह एहसास होता है कि भीड़ में हम कभी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होते। हर कदम पर तनाव, डर और अनजाने खतरों से घिरे रहने का एहसास होता है। लेकिन यह भी सच है कि…

