अन्याय और अधर्म सहने से ही समाज में पाप बढ़ता हैं-जगद्गुरु शंकराचार्य
लखनऊ, [11 मार्च]: “धर्म जहाँ पालन करने से बढ़ता है, वहीं अधर्म केवल सह लेने से बढ़ जाता है। इसलिए जितना ज़रूरी धर्म का पालन है, उतना ही आवश्यक अधर्म का प्रखर विरोध भी है।” उक्त उद्गार परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’ ने आज लखनऊ के मान्यवर कांशीराम स्मृति स्थल…

