अन्याय और अधर्म सहने से ही समाज में पाप बढ़ता हैं-जगद्गुरु शंकराचार्य

लखनऊ, [11 मार्च]: “धर्म जहाँ पालन करने से बढ़ता है, वहीं अधर्म केवल सह लेने से बढ़ जाता है। इसलिए जितना ज़रूरी धर्म का पालन है, उतना ही आवश्यक अधर्म का प्रखर विरोध भी है।” उक्त उद्गार परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’ ने आज लखनऊ के मान्यवर कांशीराम स्मृति स्थल…

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शंकराचार्य जी के गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद के समर्थन में काशीवासी गौभक्तों ने किया शंखनाद

वाराणसी,11.3.26 उत्तरप्रदेश सरकार को 40 दिन में गौमाता को राज्यमाता घोषित करने एवं प्रदेश में पूर्णतया गोकशी प्रतिबंधित करने हेतु परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज द्वारा दिए गए समयावधि के पूर्ण होने पर आज लखनऊ में शंकराचार्य जी महाराज द्वारा किए जा रहे गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद के समर्थन में आज सैकड़ों…

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गौपूजन के साथ संकल्पित शंकराचार्य जी धर्मयुद्ध शंखनाद हेतु लखनऊ रवाना

संकटमोचन मंदिर में शंकराचार्य जी के संग हजारों गौभक्तों ने किया बजरंगबाण का सामूहिक पाठ 7.3.26,वाराणसी। उत्तरप्रदेश सरकार को गौमाता को राज्यमाता घोषित करने एवं राज्य में पूर्णतया गोकशी बंद कराने हेतु परमाराध्य परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज दिए गए 40 दिन के समयावधि के 36वें दिन परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य जी…

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गौ ब्राह्मण प्रतिपालक शिवाजी महाराज की जयंती मनाकर हुआ गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा का प्रारंभ

वाराणसी,6.3.26 परमाराध्य परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज द्वारा उत्तरप्रदेश सरकार को 40 दिन के अंदर गौमाता को राज्यमाता घोषित कर प्रदेश में पूर्णतया गोकशी प्रतिबंधित करने हेतु दिए गए समयावधि के 35 दिन पूर्ण होने पर छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्म जयंती पर आज काशी के शंकराचार्य घाट पर विशेष कार्यक्रम…

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कल गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद के उपलक्ष्य में मनाई जाएगी शिवाजी की जयंती

11 मार्च को लखनऊ में होगा गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनादवाराणसी,3.3.26 गौमाता को राज्यमाता घोषित कर उत्तरप्रदेश में पूर्णतया गोकशी बंद कराने हेतु दिए गए 40 दिन के समयावधि के पूर्ण होने पर गौमाता की प्रतिष्ठा हेतु 11 मार्च को लखनऊ में होने वाले धर्मयुद्ध शंखनाद हेतु यात्रा की पूर्व संध्या पर कल 6 मार्च शुक्रवार को…

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महाशिवरात्रि : बद्रीपुर शिवमंदिर में शिवभक्तों ने किया भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक

देहरादून(अंकित तिवारी): महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जोगीवाला स्थित बद्रीपुर के प्राचीन शिवमंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी। भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना के लिए भक्तगण बेलपत्र, पुष्प, बेर और जलपात्र के साथ लंबी कतारों में खड़े होकर जलाभिषेक की प्रक्रिया का हिस्सा बने। मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य पंडित पुरुषोत्तम दत्त उनियाल ने बताया…

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अगस्त्यमुनि में भक्तों का हंगामा, गेट का आर्क तोड़ कर मैदान में पहुंची अगस्त्य ऋषि की डोली

रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि क्षेत्र में गुरुवार को मकर संक्रांति के पावन पर्व पर उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जब अगस्त्य ऋषि की डोली को मैदान में प्रवेश से रोका गया। केदारनाथ हाईवे पर स्थित अगस्त्यमुनि में मंदिर से रवाना होकर डोली को अगस्त्यमुनि मैदान स्थित गद्दीस्थल तक पहुंचना था, लेकिन खेल विभाग…

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साल के पहले स्नान पर्व पर चाक चौबंद रहेगी हरिद्वार पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था

लोहड़ी व मकर संक्रांति स्नान सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने कसी कमर ऋषिकुल ऑटोटोरियम में एकत्रित हुआ मेला ड्यूटी में लगा फोर्स मेला ड्यूटी में लगे फोर्स को जिलाधिकारी व एसएसपी ने किया ब्रीफ, दिए आवश्यक दिशा निर्देश संपूर्ण मेला क्षेत्र 08 जोन व 22 सेक्टरों में किया गया विभक्त सीसीटीवी कैमरों…

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मकर संक्रांति: आस्था, दान और प्रकृति के नूतन विहान का महापर्व— डॉ. अखिलेश चन्द्र चमोला

​​​हमारा भारतवर्ष केवल एक भौगोलिक भू-भाग नहीं, बल्कि त्योहारों, उत्सवों और जीवंत परंपराओं का एक शाश्वत राष्ट्र है। यहाँ हर प्रांत की माटी से संस्कृति की अलग सुगंध आती है, और यहाँ मनाया जाने वाला हर पर्व किसी न किसी गहरे धार्मिक और वैज्ञानिक चिंतन से जुड़ा होता है। ‘मकर संक्रांति’ भारतीय संस्कृति का एक…

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साईं सृजन पटल मासिक पत्रिका का अभिनव प्रयोग : गढ़वाली भाषा को समर्पित एक विशेष पृष्ठ

(गढ़वाली भाषा का संरक्षण और संवर्धन: साईं सृजन पटल का ऐतिहासिक पहल) डोईवाला : हमारे देश की सांस्कृतिक धरोहर में प्रत्येक भाषा और बोली का विशेष स्थान है। उत्तराखंड की पहचान और उसका गौरवपूर्ण इतिहास गढ़वाली भाषा के माध्यम से जीवित है। इस भाषा ने न केवल हमारे क्षेत्रीय जीवन को समृद्ध किया है, बल्कि…

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