आस्था, श्रद्धा और सेवा का संगम: देवढुंग स्थित मां ज्वालामुखी मंदिर

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टिहरी ( घनसाली)

(दरमियानी सिंह नेगी)
उत्तराखंड की पवित्र भूमि सदियों से देवभूमि के रूप में विख्यात रही है, जहां प्रत्येक कण में आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। इसी दिव्यता को अपने भीतर समेटे टिहरी जनपद के घनसाली ब्लॉक में स्थित बिनकखाल का देवढुंग नामक पावन स्थल, मां ज्वालामुखी भगवती के दिव्य धाम के रूप में श्रद्धालुओं के लिए अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। बासर और बूढ़केदार के मध्य स्थित यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां की आध्यात्मिक अनुभूति हर आगंतुक के हृदय को गहराई से स्पर्श करती है।
चीड़ और देवदार के विशाल वृक्षों के मध्य स्थित मंदिर परिसर की भव्यता इस धाम की दिव्यता को और भी अधिक बढ़ा देती है। प्रकृति की गोद में बसा यह स्थल मानो स्वयं मां भगवती की साक्षात उपस्थिति का अनुभव कराता है। यहां पहुंचकर प्रत्येक श्रद्धालु अपने मन को शांति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण पाता है।


मां ज्वालामुखी भगवती इस पावन धाम में विराजमान होकर अपने भक्तों को साक्षात दर्शन प्रदान करती हैं और उन्हें अपना आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि देश-विदेश से श्रद्धालु अपने परिवार एवं प्रियजनों के साथ यहां पहुंचकर मां के चरणों में शीश नवाते हैं और स्वयं को धन्य अनुभव करते हैं। विशेष रूप से नवरात्रों के पावन अवसर पर यहां का वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो उठता है, जब दूर-दूर से आए श्रद्धालु पूजा-अर्चना, कथा-कीर्तन एवं विविध धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।


इस दिव्य धाम के विकास और प्रतिष्ठा में वर्ष 2017 से 2026 तक मंदिर समिति के अध्यक्ष के रूप में श्री बचल सिंह रावत जी का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय रहा है। 80 वर्ष की आयु में भी उनका अद्भुत उत्साह, समर्पण और सेवा भावना समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके कुशल नेतृत्व और दूरदर्शिता के परिणामस्वरूप मंदिर परिसर को एक भव्य, सुव्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप प्राप्त हुआ है। उनके कार्यकाल में न केवल धार्मिक आयोजनों का सफल संचालन हुआ, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
इस पावन धाम के चौमुखी विकास में माननीय राज्य मंत्री श्री वीरेंद्रदत्त सेमवाल जी का योगदान भी अत्यंत सराहनीय रहा है। वे समय-समय पर मां ज्वालामुखी धाम के विकास हेतु अपनी सेवाएं प्रदान करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने माता वैष्णो देवी की तर्ज पर बिनकखाल से देवढुंग मंदिर परिसर तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए टिन शेड निर्माण की महत्वपूर्ण घोषणा की है, जो लगभग 15 लाख रुपये की लागत से पूर्ण किया जाएगा। यह कार्य श्रद्धालुओं को धूप एवं वर्षा से राहत प्रदान कर उनकी यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाएगा।
मंदिर समिति के सचिव श्री सोहन लाल रतूड़ी जी (भूतपूर्व सैनिक) के अनुशासित एवं अथक प्रयासों से इस पावन धाम में अष्टादश पुराण का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, बल्कि समाज में एकता, भक्ति और संस्कारों को सुदृढ़ करने का माध्यम भी बना। श्री रतूड़ी जी का यह योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
श्रीमती सोना नौटियाल जी (धर्मपत्नी श्री गिरीश चंद्र नौटियाल जी) का योगदान भी अत्यंत प्रशंसनीय रहा है। अपने जिला पंचायत सदस्य के कार्यकाल में उन्होंने मंदिर के चौमुखी विकास हेतु महत्वपूर्ण कार्य किए, जिससे यह धाम और अधिक सुसज्जित एवं व्यवस्थित बन सका। उनका यह योगदान समाज सेवा और धार्मिक आस्था का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष श्री अमर सिंह बिष्ट जी का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता, ईमानदारी और कुशलता का परिचय देते हुए मंदिर के विकास कार्यों को सुदृढ़ आधार प्रदान किया। उनके प्रयासों से अनेक योजनाएं सफलतापूर्वक साकार हो सकीं।
मंदिर समिति के सभी सम्मानित पदाधिकारी, सहयोगी एवं क्षेत्रवासी बधाई और प्रशंसा के पात्र हैं, जिनके सामूहिक प्रयासों, अटूट आस्था और निस्वार्थ सेवा के बल पर इस धाम को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप प्राप्त हुआ है।
मां ज्वालामुखी धाम केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि यह श्रद्धा, विश्वास, एकता और सामूहिक प्रयासों का जीवंत प्रतीक है। यहां का प्रत्येक कण भक्ति और ऊर्जा से ओत-प्रोत है। यह पावन स्थल हमें यह प्रेरणा देता है कि जब सेवा, समर्पण और आस्था एक साथ मिलते हैं, तो किसी भी धाम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
मंदिर समिति के सभी सम्मानित पदाधिकारीगण एवं क्षेत्र के समस्त गणमान्य व्यक्तियों को हार्दिक बधाई, जिनके सानिध्य, सहयोग और मार्गदर्शन में अष्टादश पुराण का सफल समापन संपन्न हुआ। आप सभी के कुशल नेतृत्व, समर्पण और अथक प्रयासों से यह महान धार्मिक कार्य पूर्णता को प्राप्त हुआ है।
आप सभी को हृदय से प्रणाम एवं वंदन करता हूँ। आप सभी वास्तव में साधुवाद और बधाई के पात्र हैं।


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