किसी भी पत्रकार द्वारा सर्वाधिक 106 बार व्यक्तिगत रक्तदान के टाइटल के साथ वरिष्ठ पत्रकार डॉ राकेश वशिष्ठ का रिकॉर्ड “एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स” मैं दर्ज़

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नई दिल्ली। राजेंद्र भवन ऑडिटोरियम, आईटीओ, नई दिल्ली में “एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, देवनागरी उत्थान फाउंडेशन, धराधाम इंटरनेशनल, पं. तिलक राज शर्मा स्मृति ट्रस्ट (अमेरिका) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। समारोह में देश–विदेश से पधारे अनेक विधाओं के विश्व रिकॉर्डधारी, साहित्यकारों, सामाजिक चिंतकों एवं गरिमामयी उपस्थिति रही।


इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक दूत रसायाचार्य डॉ. आई. मेड धर्मायसा, संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध आधिकारिक प्रतिनिधि जनरल प्रो. जसवीर सिंह (UNGO / IPF–IGO, USA), मदरहुड यूनिवर्सिटी, रुड़की के कुलपति, अमेरिका से पधारे अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद एवं हिंदी–देवनागरी प्रवर्तक डॉ. इंदरजीत शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। समारोह में प्रख्यात साहित्यकार एवं चिंतक डॉ. बी. एल. गौड़, अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार एवं योग–ध्यान प्रशिक्षक (माल्टा) डॉ. चोगशुआ नोगा झांग, आचार्य साहित्य विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. (डॉ.) देवेश कुमार मिश्र, तथा मानद कुलपति, जगत धर्म चक्रवर्ती एवं सौहार्द शिरोमणि संत डॉ. सौरभ पाण्डेय (धरा धाम इंटरनेशनल) मंचासीन रहे। कार्यक्रम का कुशल, ओजस्वी एवं प्रभावशाली संचालन डॉ. निशा अग्रवाल द्वारा किया गया।
इस अवसर जोधपुर के वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादकीय लेखक डॉ. राकेश वशिष्ठ को (किसी पत्रकार द्वारा सर्वाधिक 106 बार व्यक्तिगत रक्तदान करने का रिकॉर्ड) को “एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स” में ऑफिशियल दर्ज कर प्रमाणपत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया।
आपको बता दें हाल ही में गत 28 सितंबर 2025 को शहीद ए आजम सरदार भगत सिंह के जन्मदिवस पर आयोजित रक्तदान शिविर में डॉ राकेश वशिष्ठ ने अपना 106 वा रक्तदान किया कर यह उपलब्धि हासिल की थी यह रिकॉर्ड अनेक अंतराष्ट्रीय और राष्ट्रीय वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की व्यापक संस्थाओं द्वारा दर्ज की प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है डॉ राकेश वशिष्ठ द्वारा प्रतिदिन विभिन्न मुद्दों पर लिखे आलेख देश के अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं आपने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में देहदान और अंगदान हेतु पंजीयन कर संकल्प लिया है और अभी तक लगभग 542 व्यक्तियों को प्रेरित कर उनका स्वैच्छिक देहदान अंगदान हेतु पंजीयन करवाया है।


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