उत्तराखंड में पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरणीय दायित्व भी बढ़ा है : प्रो. तलवाड़

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कर्णप्रयाग (अंकित तिवारी) : डा.शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार वृहस्पतिवार को संपन्न हो गया। ‘उत्तराखंड राज्य के 25 वर्ष : उपलब्धियां एवं चुनौतियां’ विषय पर आयोजित इस वेबिनार का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ.रमेश पोखरियाल निशंक के संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड हर क्षेत्र में अग्रणी है। वेबिनार के द्वितीय दिवस के मुख्य अतिथि निदेशक उच्च शिक्षा प्रो.वी.एन. खाली ने उत्तराखंड राज्य स्थापना की शुभकामना देते हुए वेबिनार के विषय को समसामयिक बताया। विशिष्ट अतिथि के रूप में कर्णप्रयाग महाविद्यालय के पूर्व व सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो.के.एल.तलवाड़ ने ‘उत्तराखंड में बढ़ता पर्यटन : विकास और चुनौतियां’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि 25 वर्षों में राज्य ने देश-विदेश में ‘पर्यटन प्रदेश’ के रूप में अपनी विशेष पहचान बनाई है। निस्संदेह, पर्यटन उत्तराखंड राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है,किन्तु बढ़ते पर्यटन के साथ-साथ हमें यहां कि पवित्रता,नैसर्गिक सुंदरता और पर्यावरण संरक्षण को भी सहेज कर रखना होगा। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.राम अवतार सिंह ने बताया कि इस दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार में देशभर के कई विद्वानों द्वारा उत्तराखंड के विकास और चुनौतियों पर चिंतित-मनन किया गया। वेबिनार में उत्तराखंड के विकास माॅडल, आधारभूत संरचना,नवाचार, उद्यमिता,सतत् विकास, सुरक्षा,उच्च शिक्षा,कौशल विकास, स्त्री संस्कृति,पर्यटन आदि विषयों और भविष्य की चुनौतियों पर सघन चर्चा की गई।वक्ताओं के रूप में डाॅ. किशोर रायवानी,डाॅ ममता कुंवर, प्रो.सरोज वर्मा, प्रो.बी.के. सिह,डाॅ. मंजू चन्द्रा,डाॅ.एस.के.लाल,डाॅ.ए.के.पंत,डाॅ.वी.आर अंथवाल व डाॅ.नौडियाल ने अपने सारगर्भित व्याख्यान दिये। वेबिनार के सफल आयोजन में संयोजक डाॅ.आर सी.भट्ट, सह संयोजक डा.इन्द्रेश कुमार पांडेय, डाॅ.हरीश रतूड़ी व डाॅ.नेहा तिवारी पाण्डेय एवं आयोजन सचिव के रूप में डाॅ.मदन लाल शर्मा,कीर्तिराम डंगवाल, डाॅ.हरीश बहुगुणा ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। वेबिनार में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों व विद्यार्थियों सहित अन्य अनेक शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों तथा शोधार्थियों ने ऑनलाइन प्रतिभाग किया।


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