वन एवं पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल ने 41वीं खतलिंग हिमालय जागरण महायात्रा के यात्रीदल से की भेंट
उत्तराखंड संचार ब्यूरो
बन एवं पर्यावरण मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने 41 वीं खतलिंग हिमालय जागरण महायात्रा के यात्रीदल से भेंट की। देहरादून ! पर्वतीय लोकविकास समिति के अध्यक्ष और खतलिंग हिमालय जागरण महायात्रा के संयोजक प्रो. सूर्य प्रकाश सेमवाल के नेतृत्व में आज नई दिल्ली से उत्तराखंड पहुंचे यात्रीदल ने उत्तराखंड सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री सुबोध उनियाल से भेंट की।

राजाजी पार्क गेस्ट हाउस हरिद्वार रेंज में यात्रीदल ने श्री उनियाल का पुष्पगुच्छ, प्रतीक चिन्ह और शॉल से सम्मान किया। पिछले 10 वर्षों से निरंतर इंद्रमणि बडोनी जी द्वारा प्रवर्तित ऐतिहासिक खतलिंग हिमालय जागरण महायात्रा की प्रशंसा करते हुए श्री उनियाल ने इस यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए यात्रीदल से हिमालय क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों के संबंध में अपनी अध्ययन रिपोर्ट सरकार को सौंपने और व्यापक जनजागरण का आह्वान किया।

उत्तराखंड सरकार में हथकरघा एवं विकास परिषद के उपाध्यक्ष एब पर्वतीय लोकविकास समिति के संरक्षक श्री वीरेंद्र दत्त सेमवाल ने कहा कि दिल्ली से 2015 से प्रतिवर्ष सितम्बर माह में हिमालय दिवस के आसपास इस महायात्रा का आयोजन युवाओं को हिमालय के प्रति आकर्षित करना है। बाबा बूढ़ा केदार से मासरताल और वहां से सहस्रताल तक महायात्रा को जोड़ने से समग्र विकास की संभावना बढ़ेगी। वरिष्ठ पत्रकार और महायात्रा के सहयात्री श्री व्योमेश जुगरान ने कहा कि बडोनी जी के स्वप्न और आदर्श को जीवंत बनाए रखने के लिए जारी ऐसे संकल्पों को युवा और मातृ शक्ति बराबर सहयोग कर रही है। वरिष्ठ पत्रकार और भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ के संयोजक श्री तेजराम सेमवाल ने कहा कि मेरा सौभाग्य रहा कि मैंने 1994 में बडोनी जी के साथ खतलिंग में भगवान शिव का हवन किया और डॉ.मोहन सिंह रावत गांववासी जी के साथ खतलिंग और पंवाली की खूब यात्राएं की। अब विश्वविद्यालय के नौजवान युवाओं को बढ़ चढ़कर इन यात्राओं में सहभागी होना चाहिए। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.रामकृष्ण भट्ट ने कहा कि हिमालय को बचाने के लिए और बडोनी जी की दूरदर्शी सोच को जीवित रखने के लिए पांचवां धाम खतलिंग का विकास आवश्यक है। पर्वतीय लोकविकास समिति के अध्यक्ष और महायात्रा के संयोजक प्रो.सूर्य प्रकाश सेमवाल ने कहा कि दूरदर्शी नेता इंद्रमणि बडोनी ने जी ने भगवान शंकर के जिस सिद्धपीठ खतलिंग को अस्सी के दशक में पांचवां धाम घोषित किया था वह आदिदेव महादेव के सिद्धपीठ होने के साथ तिब्बत की सीमा से सटा होने के कारण सामरिक दृष्टि से संवेदनशील,सबसे उपेक्षित और पिछड़े सीमांत गंगी गांव को विकास की मुख्यधारा में लाने तथा पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस क्षेत्र को पांचवां धाम की संज्ञा दी थी,हम उसी विजन को आगे बढ़ाने के प्रयास में हैं। राजनीति और विवाद के लिए जितने पांचवें धाम खड़े किए जाएं लेकिन मौलिक और वास्तविक आज से 42 वर्ष पूर्व घोषित पांचवां धाम खतलिंग ही है। इस अवसर पर पर्वतीय लोकविकास समिति और भिलंगना क्षेत्र विकास समिति के पदाधिकारियों सहित डॉ.धर्मेंद्र सिंह,श्री कमल सिंह रौथान,श्री राजेन्द्र सिंह नेगी,अनिल सेमवाल,जयपाल राणा और आशीष सेमल्टी मौजूद रहे।

