हिन्दू महासभा ने शौर्य दिवस पर बलिदानी श्रीराम भक्तों के शौर्य को देश की अमूल्य धरोहर बताया – बी एन तिवारी

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  नई दिल्ली, अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविंद्र कुमार द्विवेदी ने शौर्य दिवस पर श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर आंदोलन मे बलिदान हुए सभी श्रीराम भक्तों को श्रद्धांजलि देते हुए सभी बलिदानी श्रीराम भक्तो को नमन किया। उन्होंने महान समाज सुधारक एवं देश के प्रथम केंद्रीय विधि मंत्री डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर के परलोक गमन दिवस पर उनका स्मरण करते हुए कहा कि उनके समाज सुधार कार्यक्रमो को पूर्ण करना समाज के सभी वर्गो का सामूहिक दायित्व है। यह जानकारी हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बी एन तिवारी ने आज जारी बयान मे दी। 
  जारी बयान मे बी एन तिवारी ने बताया कि हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविंद्र कुमार द्विवेदी ने नई दिल्ली से हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय धर्माचार्य प्रमुख महामंडलेश्वर् मंगलानंद के साथ जारी तीन अलग अलग वीडियो संदेश के माध्यम से देशवासियोँ को संबोधित किया। अपने पहले वीडियो संदेश मे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आज ही के दिन सन् 1992 मे हिन्दू महासभा, भाजपा, शिवसेना और अन्य हिंदुवादी संगठनों के नेतृत्व मे हिंदुओं के विशाल जनसमूह ने श्रीराम जन्मभूमि पर आक्रांता बाबर के सेनापति मीरबाकी द्वारा निर्मित बाबरी मस्जिद के ढांचे का विध्वंस कर अपने शौर्य का परिचय दिया था। सभी श्रीराम भक्तों का बलिदान देश की अमूल्य धरोहर है। 
  एक अन्य वीडियो संदेश मे राष्ट्रीय अध्यक्ष रविंद्र कुमार द्विवेदी ने हिन्दू समाज से श्रीराम जन्म भूमि की तर्ज पर श्री कृष्ण जन्म भूमि मथुरा और काशी विश्वनाथ मन्दिर वराणसी को भी विधर्मी प्रतीकों से मुक्त करवाकर भव्य मन्दिर निर्माण का संकल्प लेने और संकल्प को पूरा करने मे सर्वस्व अर्पित करने का आह्वान किया। 

बी एन तिवारी ने बताया कि डॉक्टर भीम राव अंबेडकर का स्मरण करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष रविंद्र कुमार द्विवेदी ने कहा कि अंबेडकर के सामाजिक समरस जातिविहिन हिन्दू समाज का निर्माण ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि हो सकती है। उन्होंने जय भीम जय मीम का नारा देने वाले अंबेडकर समर्थकों पर बरसते हुए कहा कि उनके पुरखों ने सनातन की रक्षा मे मीम वालों से लड़ते हुए अपना बलिदान दिया। ऐसे लोग अपने पुरखों के बलिदान को लज्जित कर रहे हैं। उन्होंने जय भीम जय मीम समर्थकों से मीम का रास्ता छोड़कर सनातन की ओर वापस लौटते हुए अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि देने का आह्वान किया।


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