बाल कवि कार्तिक तिवारी: गढ़वाली भाषा और नशा मुक्ति अभियान के युवा प्रेरक

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अपनी मातृभाषा गढ़वाली और नशा मुक्ति अभियान को बढ़ावा दे रहे हैं बाल कवि कार्तिक तिवारी

गोपेश्वर/गोचर,
महज 14 वर्ष की आयु में बाल कवि कार्तिक तिवारी ने अपनी मातृभाषा गढ़वाली को बढ़ावा देने के साथ-साथ समाज में नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य किया है। अपनी संस्कृति और लोकभाषा के प्रति गहरी आस्था रखने वाले कार्तिक आज विभिन्न मंचों पर गढ़वाली में कविता पाठ कर न केवल बच्चों बल्कि युवाओं को भी अपनी भाषा बोलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

जहाँ आज कई बच्चे गढ़वाली बोलने में संकोच महसूस करते हैं, वहीं कार्तिक मंचों पर निसंकोच गढ़वाली भाषा में अपनी कविताएँ प्रस्तुत करते हैं और बच्चों से भी गढ़वाली में संवाद करते हैं। इसी का परिणाम है कि उनके स्कूल के साथी बच्चे अब उनसे गढ़वाली में बातचीत करने लगे हैं और अपनी मातृभाषा को अपनाने में गर्व महसूस कर रहे हैं।

नशा मुक्ति के क्षेत्र में भी कार्तिक तिवारी का योगदान उल्लेखनीय रहा है। श्री सुनील पुंडीर द्वारा निर्देशित लघु फिल्म “जहर की राह”, जिसे गोचर मेले में विशेष रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है, में कार्तिक ने मुख्य किरदार अर्जुन की भूमिका निभाई है। उनके अभिनय ने दर्शकों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसके साथ ही समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित नशा मुक्ति अभियान के 5 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित नुक्कड़ नाटक में भी कार्तिक ने प्रभावशाली अभिनय कर जनता को नशे से दूर रहने का संदेश दिया।

कार्तिक तिवारी की यह पहल न केवल बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि गढ़वाली भाषा, संस्कृति एवं नशा मुक्ति जैसे सामाजिक अभियानों को भी नई दिशा प्रदान कर रही है।


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