राष्ट्र एवं समाज हित में सभी पंचांग कर्ताओं को व्रतों एवं त्योहारों की तिथियों में एकरूपता लानी होगी : डॉक्टर घिल्डियाल।

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देहरादून। समाज के बीच ज्योतिष विद्या की आदिकाल से चली आ रही विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए सभी पंचांग कर्ताओं को एक मंच पर आकर वर्ष भर मनाए जाने वाले व्रतों एवं त्योहारों की तिथियों में एकरूपता लानी होगी।

उपरोक्त विचार उत्तराखंड ज्योतिष रत्न एवं सहायक निदेशक संस्कृत शिक्षा आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने व्यक्त किए वह उत्तराखंड विद्वत सभा द्वारा आयोजित एकदिवसीय प्रांतीय उच्च स्तरीय ज्योतिष संगोष्ठी को अति विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे, उन्होंने कहा कि यदि पंचांग करता एक मंच पर नहीं आते हैं तो वह दिन दूर नहीं है जब जनता का विश्वास पंचांगों से उठने लगेगा और लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से मार्गदर्शन प्राप्त करने लगेंगे।

अपनी सटीक भविष्यवाणियों के लिए अंतरराष्ट्रीय जगत में प्रसिद्ध उत्तराखंड ज्योतिष रत्न डॉक्टर घिल्डियाल ने उपस्थित तमाम विद्वानों का आवाहन करते हुए कहा कि विद्वानों का क्षेत्र होने से मतभिन्नता अवश्य होती है, परंतु एक मंच पर बैठकर उसको दूर किया जाना परम आवश्यक है, क्योंकि लोगों का मार्गदर्शन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सही ढंग से नहीं कर सकता है क्योंकि ज्योतिष केवल गणित ही नहीं आध्यात्मिक साधना का भी विषय है।

गोष्टी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि बद्रीनाथ धाम के धर्म अधिकारी आचार्य राधा कृष्ण थपलियाल एवं पूर्व धर्म अधिकारी आचार्य जगदंबा प्रसाद सती ने कहा कि पहले तो पूरे देश में नहीं तो कम से कम उत्तराखंड राज्य में तो व्रतों एवं त्योहारों को एक ही तिथि पर मनाया जाना चाहिए जिससे सभी विद्वान जनता के बीच उपहास का पात्र न बने।

संगोष्ठी में उपस्थित होने पर अतिथियों का फूल माला और अंग वस्त्र भेंट कर सम्मान करते हुए सभा के प्रांतीय अध्यक्ष आचार्य हर्ष पति गोदियाल ने कहा कि सभा का प्रयास सभी विद्वानों को एक मंच पर लाकर जनता को उचित मार्गदर्शन प्रदान करना है, उन्होंने गोष्ठी में उपस्थित हुए समस्त विद्वानों का आभार जताया। गोष्टी को आचार्य रमेश पांडे, राजेश बेंजवाल, डॉ शंभू प्रसाद पांडे, संगठन सचिव राजेश अमोली ने भी संबोधित किया। संचालन सभा के महासचिव डॉक्टर अजय डबराल ने किया, मौके पर प्रदेश के तमाम जनपदों से ज्योतिष के विद्वानों ने प्रतिभाग किया।

*उत्तराखंड विद्वत सभा द्वारा आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सहायक निदेशक डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल।*


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