कौशलम् कार्यशाला: छात्रों में उद्यमी मानसिकता और 21वीं सदी के कौशलों का संवर्धन
डाइट चढ़ीगांव, पौड़ी गढ़वाल, 8 नवंबर 2025 – डाइट चढ़ीगांव, पौड़ी गढ़वाल में 6 से 8 नवंबर 2025 तक कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। कौशलम् पाठ्यचर्या के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला में जिले के 6 ब्लॉकों से आए 90 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सक्रिय भागीदारी की।

कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों में कैरियर के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें उद्यमी मानसिकता के साथ 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों से लाना था। विशेषज्ञ संदर्भदाताओं ने छात्रों को कैरियर एक्सप्लोरेशन विषय पर व्यावहारिक और प्रेरक प्रशिक्षण दिया, जिससे वे अपनी रुचि और योग्यता के आधार पर उपयुक्त कैरियर विकल्प चुन सकें। प्रशिक्षण में जोर दिया गया कि कैरियर केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक ऐसा अवसर है जहां वे अपनी सृजनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता और नेतृत्व कौशल को वास्तविक जीवन में लागू कर सकते हैं।
कार्यशाला में उद्यमी मानसिकता (Entrepreneurial Mindset) के विकास पर विशेष बल दिया गया। छात्रों को प्रेरित किया गया कि वे सिर्फ रोजगार खोजने वाले न बनें, बल्कि रोजगार सृजन करने वाले बनें। इसके लिए जोखिम उठाने की क्षमता, रचनात्मक सोच, निर्णय लेने की योग्यता, और टीमवर्क जैसे गुणों पर जोर दिया गया। साथ ही, 21वीं सदी के आवश्यक कौशल जैसे संचार कौशल, आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, सहयोग, डिजिटल साक्षरता, और आत्म-प्रबंधन को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया।
संदर्भदाताओं में हरीश चन्द्र (अ०उ०रा०३०का०, खिसूं), जया नौडियाल (रा०उ०मा०वि० नौडियालगांव, कल्जीखाल), सुरेश मिश्रा (रा०३०का० सीकू पाबौ), पूनम कुकरेती (रा०इ०का०, बनचूरी, यमकेश्वर), और लक्खी रावत (रा०उ०मा०वि० चोपताखाल, बीरोंखाल) ने मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने बताया कि कौशलम् पाठ्यचर्या केवल एक विषय नहीं, बल्कि एक सोच है जो शिक्षा को जीवन से जोड़ती है।
कार्यक्रम में डाइट से श्रीमती अनुजा मैठाणी और उद्यमी फाउंडेशन से श्रीमती सुनीता राणा ने विशेष भूमिका निभाई। तीन दिवसीय प्रशिक्षण ने शिक्षकों को नई शिक्षण विधाओं से परिचित कराया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मूल उद्देश्य—“सीखना जीवन के लिए”—को व्यवहार में उतारने का मार्ग दिखाया।
कार्यशाला का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि यदि शिक्षा में कौशल, सोच और अवसरों का संतुलन हो, तो विद्यार्थी न केवल बेहतर कैरियर चुनते हैं, बल्कि समाज के लिए भी सशक्त योगदानकर्ता बनते हैं। प्रशिक्षण के समापन पर राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित गढ़वाल मन्डलीय नशा उन्मूलन नोडल अधिकारी अखिलेश चंद्र चमोला ने सन्दर्भ दाता हरीश चंद्र सती की अनुशंसा करते हुए कहा कि इनके द्वारा प्रशिक्षण बहुत ही बेहतर तरीके से दिया गया। किसी तरह से बोझिल नहीं रहा।हर विषय वस्तु को बड़े ही सरल और सुगमतापूर्वक से समझाया गया। हमें पूरा विश्वास है कि इस प्रशिक्षण लाभ हम सब अपने कक्षा में छात्र छात्राओं को देकर आत्म निर्भर भारत, निपुण भारत बनाने की जो संकल्पना है।उसे साकार बनाने का सार्थक प्रयास करेंगे।

