शनिवार और मंगलवार को स्पर्श करने की वजह से दीपावली का त्यौहार नवग्रहो के उपचार की दृष्टि से अद्भुत है : आचार्य दैवज्ञ।

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देहरादून। इस वर्ष दीपावली का त्यौहार धनतेरस 18 अक्टूबर शनिवार से प्रारंभ होकर 21 अक्टूबर लक्ष्मी पूजन मंगलवार तक होने की वजह से नवग्रहो के उपचार के लिए यंत्र और मंत्र साधना के लिए अद्भुत संयोग बन रहा है।

मंत्रों की ध्वनि को यंत्रों में परिवर्तित करने का विज्ञान विकसित करने की वजह से अंतरराष्ट्रीय जगत में प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ”विश्लेषण करते हुए कहते हैं, कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह धन और संपदा में वृद्धि करने वाला तथा मंगल ग्रह राज्य लक्ष्मी का कारक होने से इन दोनों के बीच दीपावली के त्यौहार का पड़ना अपने आप में बहुत बड़ा अद्भुत संयोग है, जिसका फायदा लोगों को उठाना चाहिए।

आचार्य दैवज्ञ कहते हैं कि जिन लोगों की जन्म कुंडली में आयु, स्वास्थ्य,संतान, विद्या ,रोजगार, विवाह , लक्ष्मी प्राप्ति, व्यापार में लाभ ,राजनीति में लाभ, राजकीय सेवा में उच्च पद की प्राप्ति, भूमि भवन का लाभ के लिए ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं है ,उनके लिए इस दौरान मंत्रों की ध्वनि को यंत्रों में परिवर्तित करके ग्रहों की यंत्र सिद्धि से सभी परिस्थितियों को अनुकूल किया जा सकता है

डॉ दैवज्ञ ने लोगों को सलाह दी है कि समय पर अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवा कर इस अद्भुत संयोग का लाभ उठाना चाहिए क्योंकि कोई भी मनुष्य बलवान अथवा निर्बल नहीं होता है यदि होता है तो सब कुछ समय होता है और समय को अनुकूल और प्रतिकूल समझने और करने के विज्ञान का नाम ही ज्योतिष है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार चिंता करने से हम मौसम की प्रतिकूलता को नहीं बदल सकते हैं, परंतु छाता बनाने का चिंतन करके मौसम की प्रतिकूलता से बचा जा सकता है ठीक इसी प्रकार से भाग्य में लिखे हुए के प्रति चिंता करने के बजाय ज्योतिष के उपायों से भी पूर्ण रूप से रक्षा हो जाती है।


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